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भारत-भूटान के बीच जल्द शुरू होगी क्रॉस-बॉर्डर मनी ट्रांसफर सेवा

March 22, 2026


 भारत और भूटान के बीच डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल की गई है। जल्द ही दोनों देशों के बीच यूपीआई के जरिए क्रॉस-बॉर्डर मनी ट्रांसफर (विदेश में पैसे भेजने की सुविधा) यानी धन-प्रेषण पहल शुरू की जाएगी।


यह सुविधा डाक नेटवर्क के जरिए दी जाएगी, जिसमें यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (यूपीयू) के पोस्ट ट्रांसफर सिस्टम को भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) से जोड़ा जाएगा।


इस पहल से दोनों देशों के लोगों को सस्ता और आसान तरीके से पैसे भेजने और प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी, जिससे वित्तीय कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी। इस संबंध में भारत और भूटान ने डाक सहयोग के लिए एक समझौता (एमओयू) भी किया है, जो इंडिया पोस्ट और भूटान पोस्ट के बीच सहयोग का एक ढांचा तैयार करेगा।


इस समझौते के तहत डाक सेवाओं, तकनीकी विकास, लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, फिलेटली (डाक टिकट संग्रह), क्षमता निर्माण और ज्ञान के आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा।


दोनों देशों ने प्रशिक्षण और कौशल विकास पर भी जोर दिया है। इसके तहत भूटान के डाक अधिकारी भारत में प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे, जिनमें रफी अहमद किदवई राष्ट्रीय डाक अकादमी और अन्य प्रशिक्षण केंद्र शामिल हैं।


इन कार्यक्रमों में संचालन, प्रबंधन और नई तकनीकों से जुड़ी जानकारी दी जाएगी ताकि डाक सेवाओं को और बेहतर बनाया जा सके।


इसके अलावा, भारत और भूटान ने तकनीकी क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। इसमें डिजिटल पोस्टल सिस्टम और डिजिटल एड्रेस कोड जैसी तकनीकों को साझा करना शामिल है, जिससे लॉजिस्टिक्स और सेवाओं को और बेहतर बनाया जा सके।


दोनों देशों ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान और फिलेटिली के क्षेत्र में भी सहयोग जारी रखने पर सहमति जताई है। भूटान पोस्ट को भारत में आयोजित डाक टिकट प्रदर्शनी में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।


भारत ने यह भी कहा है कि वह डाक नेटवर्क के जरिए वित्तीय सेवाओं को मजबूत करने और लोगों तक आसानी से बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाने के अपने अनुभव को भूटान के साथ साझा करने के लिए तैयार है। (इनपुट-आईएएनएस)

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विश्व जल दिवस: सूखते जलस्रोत, बढ़ती प्यास और संकट में घिरता मानव जीवन

March 22, 2026


 “जल ही जीवन है” यह केवल एक सूक्ति नहीं, बल्कि सृष्टि के अस्तित्व का शाश्वत आधार है। नीले ग्रह के रूप में विख्यात हमारी पृथ्वी आज ऐसे संवेदनशील दोराहे पर खड़ी है, जहां उसकी नीलिमा पर संकट के गहरे बादल घिरते जा रहे हैं। हर वर्ष 22 मार्च को मनाया जाने वाला World Water Day अब मात्र औपचारिक आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि यह आत्ममंथन, चेतावनी और सामूहिक संकल्प का प्रतीक बन चुका है। आज नदियां करुण स्वर में सिसक रही हैं, झीलें अपने अस्तित्व के अंतिम क्षण गिन रही हैं और धरती की गहराइयों में छिपा भूजल निरंतर दूर होता जा रहा है। जिस सभ्यता का उदय जल के सान्निध्य में हुआ, वही आज जल संकट की विभीषिका से जूझने को विवश है। यह परिस्थिति केवल प्राकृतिक असंतुलन का परिणाम नहीं, बल्कि अनियंत्रित विकास, उपभोगवादी मानसिकता और पर्यावरण के प्रति हमारी निरंतर उपेक्षा का प्रतिफल है। आज यह प्रश्न हमारे समक्ष अत्यंत प्रासंगिक और अनिवार्य रूप में खड़ा है क्या हम अनजाने में अपने भविष्य को जलविहीन, संघर्षग्रस्त और अस्थिर बनाने की दिशा में अग्रसर हो रहे हैं?


जल ही सुख और समृद्धि का स्रोत


पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व जल पर ही आधारित है। मानव शरीर का लगभग 60–70% भाग जल से निर्मित है और हर जैविक प्रक्रिया जल पर निर्भर करती है। इतिहास साक्षी है कि महान सभ्यताएं सिंधु, नील और मेसोपोटामिया नदियों के किनारे विकसित हुईं। जल ने केवल जीवन को जन्म नहीं दिया, बल्कि संस्कृति, अर्थव्यवस्था और समाज को आकार दिया। भारतीय परंपरा में जल को देवत्व का स्थान प्राप्त है। “आपो हिष्ठा मयोभुवाः” अर्थात जल ही सुख और समृद्धि का स्रोत है। किंतु आधुनिक युग में यह श्रद्धा उपभोग में परिवर्तित हो गई है और यही परिवर्तन आज संकट का मूल कारण बन गया है।


सूखते जल स्रोत प्रकृति का मौन विलाप


आज विश्व भर में ताजे जल स्रोत तेजी से सिमट रहे हैं। नदियों का क्षरण हो रहा है- गंगा, यमुना, सिंधु और नील जैसी नदियां अब अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही हैं। अतिक्रमण, प्रदूषण और अत्यधिक दोहन ने इन्हें कई स्थानों पर नालों में बदल दिया है। झीलों का लोप- मध्य एशिया का अरल सागर, जो कभी विश्व की चौथी सबसे बड़ी झील था, आज लगभग समाप्त हो चुका है। भारत में भी बेंगलुरु, उदयपुर और दिल्ली की अनेक झीलें कंक्रीट के जंगलों में विलुप्त हो रही हैं। भूजल का क्षय-भूजल, जिसे अदृश्य जल भंडार कहा जाता है, सबसे तेजी से समाप्त हो रहा है। यह संकट इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसका प्रभाव तुरंत दिखाई नहीं देता, पर इसके परिणाम दीर्घकालिक और विनाशकारी होते हैं।


जनसंख्या और उपभोग का दबाव


विश्व की बढ़ती जनसंख्या जल की मांग को निरंतर बढ़ा रही है। United Nations के अनुसार, विश्व की लगभग आधी आबादी वर्ष के किसी न किसी समय जल संकट का सामना करती है। 2050 तक वैश्विक जनसंख्या 9–10 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे जल की मांग और अधिक बढ़ेगी। यह बढ़ती प्यास केवल पीने के पानी तक सीमित नहीं है यह कृषि, उद्योग, ऊर्जा और शहरी जीवन से जुड़ी हुई है।


शहरीकरण के कारण भूजल पुनर्भरण में बाधा


भारत विश्व का सबसे बड़ा भूजल उपभोक्ता है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, देश के लगभग 600 मिलियन लोग उच्च जल तनाव का सामना कर रहे हैं और 21 प्रमुख शहर “डे-ज़ीरो” की स्थिति के करीब हैं। प्रमुख कारण-अंधाधुंध दोहन (ट्यूबवेल, बोरवेल)। जल-गहन फसलें (धान, गन्ना)। वर्षा जल संचयन का अभाव। शहरीकरण के कारण भूजल पुनर्भरण में बाधा। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में स्थिति “डार्क ज़ोन” तक पहुंच चुकी है।


जलवायु परिवर्तन और जल चक्र का विघटन


जलवायु परिवर्तन ने जल संसाधनों पर गहरा प्रभाव डाला है। जल चक्र का असंतुलन-जल चक्र, जो वर्षा, वाष्पीकरण और पुनर्भरण के माध्यम से संतुलन बनाए रखता है, अब अस्थिर हो चुका है। प्रमुख प्रभाव-हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। मानसून अनियमित हो गया है। सूखा और बाढ़ की घटनाएं बढ़ रही हैं। वाष्पीकरण दर में वृद्धि। अब बारिश “संतुलित” नहीं, बल्कि “अत्यधिक और असमान” हो रही है। कुछ क्षेत्रों में बाढ़, तो कुछ में भीषण सूखा।


कंक्रीट के जंगल और जल संकट


तेजी से बढ़ते शहर जल संकट के केंद्र बनते जा रहे हैं। तालाबों और आर्द्रभूमियों का अतिक्रमण। कंक्रीट के कारण वर्षा जल का जमीन में न समाना। सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट का नदियों में प्रवाह। दिल्ली, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे शहर जल संकट के जीवंत उदाहरण हैं, जहां पानी की आपूर्ति एक बड़ी चुनौती बन चुकी है।


कृषि और खाद्यान्न सुरक्षा पर संकट


विश्व के कुल मीठे पानी का लगभग 70–80% हिस्सा कृषि में उपयोग होता है। पारंपरिक “फ्लड इरिगेशन” में भारी जल बर्बादी। जल-गहन फसलों का अत्यधिक उत्पादन। अनियमित वर्षा से फसल उत्पादन में गिरावट। यदि जल संकट इसी तरह बढ़ता रहा, तो खाद्यान्न संकट और वैश्विक भुखमरी का खतरा बढ़ सकता है।


एशिया और अफ्रीका की चुनौती


एशिया और अफ्रीका जल संकट के सबसे बड़े केंद्र बनते जा रहे हैं। उप-सहारा अफ्रीका में लोग पानी के लिए कई किलोमीटर पैदल चलते हैं। मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में जल तनाव चरम पर है। लाखों लोग सुरक्षित पेयजल से वंचित हैं। यह संकट केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक असमानता का भी कारण बन रहा है।


स्वास्थ्य पर दूषित जल का प्रभाव


जल संकट का अर्थ केवल जल की कमी नहीं, बल्कि सुरक्षित जल की कमी भी है। हैजा, डायरिया, टाइफाइड जैसी बीमारियां। आर्सेनिक और फ्लोराइड से कैंसर और हड्डी रोग। स्वच्छता की कमी से संक्रमण स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव सबसे अधिक गरीब और ग्रामीण वर्ग पर पड़ता है।


समाधान की राह संकट से संभावना तक


इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए बहुआयामी और सतत दृष्टिकोण आवश्यक है। वर्षा जल संचयन। हर घर, हर भवन में Rainwater Harvesting अनिवार्य किया जाए। जल का पुनर्चक्रण। अपशिष्ट जल को शुद्ध कर उद्योग और सिंचाई में पुनः उपयोग किया जाए। ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा दिया जाए “पर ड्रॉप, मोर क्रॉप”। पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन हेतु तालाब, बावड़ी और कुओं को पुनर्जीवित करना होगा। जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाना होगा।


जल संकट को लेकर मोदी सरकार ने दूरदर्शी पहल की


भारत में बढ़ते जल संकट को ध्यान में रखते हुए नरेंद्र मोदी की सरकार ने जल संरक्षण और प्रबंधन के क्षेत्र में अनेक सकारात्मक और दूरदर्शी पहलें की हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य केवल जल उपलब्धता बढ़ाना नहीं, बल्कि इसके सतत और न्यायसंगत उपयोग को सुनिश्चित करना भी है। जल जीवन मिशन इस दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना ने लाखों परिवारों को जल संकट से राहत दी है और महिलाओं के श्रम को भी कम किया है। वहीं अटल भूजल योजना के माध्यम से भूजल के अंधाधुंध दोहन को रोकने और समुदाय आधारित जल प्रबंधन को बढ़ावा दिया गया है।


नदियों के संरक्षण हेतु नमामि गंगे कार्यक्रम ने प्रदूषण नियंत्रण और जल गुणवत्ता सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत “हर खेत को पानी” का लक्ष्य रखते हुए जल के कुशल उपयोग और सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को प्रोत्साहित किया गया है। इसके अतिरिक्त जल शक्ति अभियान ने जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप दिया है, जिसमें वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों का पुनर्जीवन और व्यापक जन जागरूकता पर बल दिया गया है। इन सभी प्रयासों के समन्वय के लिए जल शक्ति मंत्रालय का गठन भी एक महत्वपूर्ण कदम है। इन पहलों के माध्यम से सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि जल संकट का समाधान केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि जनभागीदारी और सतत प्रयासों से संभव है।


हर बूंद में बसता भविष्य


जल हमारे पूर्वजों की विरासत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का ऋण है। यदि हम आज अपनी जीवनशैली और जल प्रबंधन में परिवर्तन नहीं करते हैं तो भविष्य की पीढ़ियां हमें क्षमा नहीं करेंगी। “जल ही जीवन है” यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि अस्तित्व का सत्य है। हर बूंद में जीवन की संभावना छिपी है, और हर बूंद की बर्बादी विनाश का मार्ग प्रशस्त करती है। World Water Day हमें यह याद दिलाता है कि जल संरक्षण केवल पर्यावरणीय कर्तव्य नहीं, बल्कि मानवीय उत्तरदायित्व है। अब समय आ गया है हम उपभोग से संरक्षण की ओर बढ़ें, लालच से संतुलन की ओर लौटें, और विकास को प्रकृति के साथ जोड़ें। क्योंकि यदि जल है, तो ही जीवन है और यदि जीवन है, तो ही भविष्य है।

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Tibetan Government Leaders Condemn China’s Ethnic Unity & Progress Promotion Law

March 22, 2026


 Leaders of the Tibetan Government in Exile today strongly condemned China’s newly passed Ethnic Unity and Progress Promotion Law, saying it will further intensify repression in Tibet and other regions. The law, signed by Chinese President Xi Jinping on 12th of this month, calls for ethnic unity and will come into effect on 1st of July this year.

 

The Tibetan leaders described the move as a longstanding repression that accelerates the erasure of Tibetan, Uyghur, and other minority cultures. The Tibetan leadership in exile has called on the international community to closely monitor the implementation of the law and raise concerns over its potential impact on human rights and cultural freedoms.

 

China’s Ethnic Unity and Progress Promotion Law is widely seen as a legal mechanism to assimilate China’s 55 officially recognised ethnic minorities into the dominant Han Chinese population, raising concerns over potential human rights violations.

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ईरान ने हिंद महासागर में अमरीकी-ब्रिटिश सैन्य ठिकाने पर किया हमला

March 22, 2026


 तेहरान। ईरान ने हिंद महासागर में स्थित अमरीकी-ब्रिटिश सैन्य ठिकाने डिएगो गार्सिया पर दो मध्यवर्ती दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें (आईआरबीएम) दागी हैं, हालांकि हमले में किसी के हताहत होने या घायल होने की सूचना नहीं है। ईरान की मेहर समाचार एजेंसी (एमएनए) ने बताया, “ईरान ने हिंद महासागर के मध्य में स्थित एक संयुक्त अमेरिकी-ब्रिटिश सैन्य अड्डे ‘डिएगो गार्सिया’ पर दो आईआरबीएम मिसाइलें दागीं।” डिएगो गार्सिया पर यह हमला पश्चिमी एशिया में चल रहे युद्ध में एक बड़े तनाव का प्रतीक है तथा इस बात का संकेत है कि अब युद्ध पश्चिमी एशिया से निकलकर हिंद महासागर तक पहुंच गया है।


ईरान से लगभग 4,000 किलोमीटर दूर डिएगो गार्सिया पर हमले का तात्पर्य है कि ईरान की मिसाइलों की मारक क्षमता पहले के अनुमान से कहीं अधिक है। एमएनए ने कहा कि ईरान द्वारा अमेरिका के सुदूर सैन्य अड्डे को निशाना बनाना लंबी दूरी के ठिकानों को भेदने की उसकी मिसाइल क्षमता को प्रदर्शित करता है। यह हमला ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के उस फैसले के बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने अमेरिका को ईरानी मिसाइल ठिकानों पर ‘रक्षात्मक’ संचालन के लिए डिएगो गार्सिया और अन्य ब्रिटिश ठिकानों का उपयोग करने की अनुमति दी थी।

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने डिएगो गार्सिया पर हमले को ‘आत्मरक्षा का अधिकार’ बताते हुए कहा कि इस आधार को ‘ईरान के खिलाफ हमले’ के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति देने से ब्रिटिश नागरिकों की जान खतरे में पड़ गई है। डिएगो गार्सिया अमरीका की लंबी दूरी के बमवर्षकों विमानों और नौसैनिक संपत्तियों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है। इसे निशाना बनाने का उद्देश्य पूरे एशिया में अमेरिकी सेना की सैन्य आपूर्ति के साथ-साथ रसद आपूर्ति को बाधित करना है।

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Heavy Snowfall Hits Darjeeling Hills in West Bengal

March 22, 2026


 The high mountain ridges in Darjeeling Hills of West Bengal has received heavy snowfall. Since the day before yesterday, the area is getting moderate to heavy rainfall in all low-altitude areas, where as upto 6 to 10 feet of snowfall in famous tourist areas of Sandakphu and Falut. As per latest report few tourists have been stuck in the area.


The district police has launched rescue operations and also advise the tourist not to visit the area till the connectivity is restored. Due to the heavy snowfall in the areas, the tourists and district tourist operators are seen happy. Late snowfall in this world’s famous tourist places of Sandakphu and Falut is expected a record tourist footfall in the coming days.


After a gap of two decades, Darjeeling Hills received such heavy rain and snowfall at the end of March. Normally, during winter the hills get rainfall and snowfall. But during this winter there was no rainfall and very poor snowfall. As per a climate expert, these are the effects of climate change. Normally, after the Holy Festival, the temperature in the Hills, Doars and Plains gradually increases and summer gets start. But due to this weather return the temperature in Darjeeling Hills and Siliguri Plains has been dropped down to 15 to 22 degrees Celsius.

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LPG Crisis : एलपीजी भरा एक और भारतीय जहाज होर्मुज पार, ईरानी नेवी ने की मदद

March 22, 2026

 


अमरीका-इजराइल और ईरान जंग का शनिवार को 22वां दिन थी। ईरानी नेवी ने 13 मार्च की रात को एक भारतीय जहाज को सुरक्षित तरीके से होर्मुज स्ट्रेट पार कराया था। एलपीजी लेकर आ रहा ये जहाज 10 दिन से फारस की खाड़ी में फंसा था। रिपोर्ट के मुताबिक, यह काम भारत और ईरान के बीच बातचीत के बाद हुआ। जहाज को पहले से तय रास्ते से निकाला गया ताकि वह हमलों से बच सके।


इस दौरान जहाज का ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर दिया गया था। हालांकि रिपोर्ट में इस जहाज का नाम नहीं बताया गया है। अभी तक दो भारतीय जहाज शिवालिक (16 मार्च) और नंदा देवी (17 मार्च) होर्मुज के रास्ते एलपीजी लेकर भारत पहुंचे हैं। वहीं फारस की खाड़ी में अभी भी करीब 22 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं।

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BCCI Announces India Tour of Ireland for T20I Series

March 22, 2026

 


The Board of Control for Cricket in India (BCCI) announced the schedule for the Senior Indian Men’s Team tour of Ireland for a two-match T20I series in June this year. The Men in Blue will play the first T20I on the 26th of June in Belfast, followed by the second and last T20I on the 28th of June at the same venue. Team India have toured Ireland three times in the past eight years. This tour will mark India’s return to Belfast for the first time since 2007.

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पहली बार अदरक खरीद के लिए 30 रुपए MSP, जानें अन्य फसलों पर एमएसपी

March 22, 2026

 


हिमाचल प्रदेश में गेहूं के एमएसपी को 60 रुपए से बढ़ाकर 80 रुपए प्रति किलोग्राम किया जाएगा। इसके अलावा मक्का के एमएसपी को 40 रुपए से बढ़ाकर 50 रूपय प्रति किलोग्राम किया जाएगा। विधानसभा के बजट सत्र में शनिवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने वर्ष 2026-27 के बजट भाषण इसका ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि पांगी घाटी के जौ के एमएसपी को 60 रुपए से बढ़ाकर 80 रुपए प्रति किलोग्राम किया जाएगा। हल्दी के एमएसपी को 90 रुपए से बढ़ाकर 150 रुपए प्रतिकिलो किया जाएगा। इसके अलावा प्रदेश में पहली बार अदरक के लिए एमएसपी को 30 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से प्रदान करने की घोषणा की गई है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और आज भी राज्य की अधिकांश ग्रामीण आबादी की आजीविका का मुख्य आधार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते मौसम और बाहरी हाइब्रिड बीजों पर निर्भरता ने किसानों को केमिकल इनपुट्स की ओर धकेला है। इस परिप्रेक्ष्य में, राज्य सरकार बीज सम्प्रभुता सुनिश्चित करने हेतु बीज गांव की स्थापना करेगी, जिसमें 50 से 100 किसानों के समूह पारंपरिक बीजों का उत्पादन करेंगे। चुने हुए गांवों में सामुदायिक बीज बैंक बनाया जाएगा। क्लाइमेट रेजिलिएंट फसलें जैसे देशी मक्का, मसूर, लाल चावल, कोदा, अदरक, राजमा, माश आदि पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बीज उत्पादकों को 5000 रुपए पति बीघा की बीज उत्पादन सबसिडी दी जाएगी।

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Israeli PM Netanyahu Conveys Prayers to Injured After Iran’s Attack Near Dimona & Negev Research Centre

March 22, 2026


 Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu held talks today with Arad Mayor Yair Maayan and conveyed his prayers for those injured in Iran’s attack near Israel’s Dimona and the Negev nuclear research centre. According to the Israeli Foreign Ministry, more than 100 people, including children, were injured in the attack. In a social media post, the Ministry stated that the Iranian regime had devastated Arad and Dimona by deliberately targeting civilians with missiles. 

 

Yair Maayan, the mayor of Arad in southern Israel, said that about 150 families were evacuated from the neighbourhood that was hit. 

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U.S. President Trump Threatens to “Hit and Obliterate” Iran’s Power Plants

March 22, 2026

 


U.S. President Donald Trump has threatened to “hit and obliterate” Iran’s power plants if Tehran does not reopen the Strait of Hormuz within 48 hours. Trump issued the ultimatum on Truth Social this morning, giving Iran exactly 48 hours to open the vital waterway or face a new round of attacks. He stated that the United States would target various Iranian power plants, starting with the biggest one first.

 

In another post, Trump said that Iran wants to make a deal, but he does not, arguing that he has already achieved his objectives weeks ahead of schedule.

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Cricket: Rwanda’s Utagushimaninde Becomes Youngest Women’s T20I Centurion

March 22, 2026


 In Women’s Cricket, Rwanda’s Fanny Utagushimaninde has become the youngest centurion ever in Women’s T20I history. Rwanda opener Utagushimaninde scored 111 not out off just 65 balls against Ghana in the Nigeria Invitational Women’s T20I Tournament. Making her debut at 15 years and 223 days, Utagushimaninde brought up her ton in the 18th over of the innings. She surpassed the record held by Uganda’s Prosscovia Alako, who was 16 years and 233 days old when she scored a ton against Mali in 2019. Utagushimaninde’s unbeaten 111 was also the highest score by a Women’s player on T20I debut, going past Australia’s Karen Rolton, who scored an unbeaten 96 against England in 2005. 

 

On the back of Utagushimaninde’s record-breaking innings, Rwanda posted 210 for 3 in 20 overs and restricted Ghana to just 88 for 8, registering a massive 122-run victory.

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Iran fires missiles at Israeli cities of Dimona & Arad, near Negev Nuclear Research Center

March 22, 2026


 Iranian-linked media outlets have claimed that missiles were fired toward the vicinity of Israel’s Dimona and Negev nuclear research centre, describing the strikes as retaliation for what they say were US-Israeli attacks on Iran’s Bushehr and Natanz nuclear facilities. Israeli officials have not confirmed any major damage at nuclear-related sites, though authorities have reported extensive air-defence activity.

 

In the UAE, authorities in Ras Al Khaimah confirmed that air defences successfully intercepted incoming threats. In a statement, officials said, “the sounds heard in some areas of the emirate are the result of successful aerial interceptions.” Residents were urged to rely only on official channels for updates and to avoid sharing unverified footage or rumours on social media.

 

The interceptions follow days of Iranian missile and drone launches toward the UAE, most of which have been shot down by Emirati defence systems. Iran’s Islamic Revolutionary Guard Corps had previously threatened to strike Ras Al Khaimah, warning residents to immediately evacuate. The IRGC said the city was being targeted on the grounds that it had been used to launch attacks against Iranian islands. These developments form part of a broader wave of Iranian retaliatory action against both Israel and its regional partners.

Iran fires missiles at Israeli cities of Dimona & Arad, near Negev Nuclear Research Center Iran fires missiles at Israeli cities of Dimona & Arad, near Negev Nuclear Research Center Reviewed by SBR on March 22, 2026 Rating: 5
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