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1947 Partition: जब भारतीय सेना भी बंट गई, जानिए कैसे हुआ फौज का विभाजन

8/16/2026 09:01:00 pm

 



15 अगस्त 1947 भारत के इतिहास का गौरवपूर्ण दिन है, लेकिन आजादी के साथ देश ने विभाजन का गहरा दर्द भी झेला। भारत और पाकिस्तान के निर्माण के साथ केवल जमीन, प्रशासन और संसाधनों का ही बंटवारा नहीं हुआ, बल्कि British Indian Army को भी दो हिस्सों में विभाजित करना पड़ा।

यह प्रक्रिया बेहद जटिल थी। उन सैनिकों को अलग-अलग सेनाओं में जाना पड़ा, जो वर्षों से एक ही बैरक में रहते, साथ प्रशिक्षण लेते और युद्ध के मैदान में एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ते थे।

सेना के बंटवारे की शुरुआत

जून 1947 में भारत के विभाजन का फैसला होने के बाद सशस्त्र बलों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हुई। फील्ड मार्शल सर क्लॉड ऑचिनलेक के नेतृत्व में सैन्य पुनर्गठन का काम आगे बढ़ाया गया। भारत और पाकिस्तान के लिए सेना, हथियार, सैन्य प्रतिष्ठान और अन्य संसाधनों के बंटवारे की विस्तृत योजना तैयार की गई।

सैन्य संसाधनों को broadly लगभग 2:1 के अनुपात में बांटने की व्यवस्था की गई, हालांकि अलग-अलग सैन्य शाखाओं और संपत्तियों में वास्तविक वितरण परिस्थितियों के अनुसार अलग रहा।

सैनिकों को कैसे बांटा गया?

सबसे कठिन काम सैनिकों और रेजिमेंटों का पुनर्गठन था। कुछ रेजिमेंटों की भर्ती संरचना ऐसी थी जिसमें किसी विशेष क्षेत्र, समुदाय या वर्ग के सैनिकों की बड़ी संख्या होती थी। वहीं कई यूनिटों में विभिन्न समुदायों के सैनिक साथ सेवा करते थे।

ऐसे मामलों में सैनिकों को विकल्प दिया गया कि वे भारत या पाकिस्तान में से किस सेना में सेवा जारी रखना चाहते हैं। इसके बाद यूनिटों और सैनिकों का पुनर्गठन किया गया।

इस प्रक्रिया में कई सैनिकों और अधिकारियों को अपने पुराने साथियों से अलग होना पड़ा। एक ही रेजिमेंट में साथ सेवा करने वाले लोगों के रास्ते अलग हो गए।

सैम मानेकशॉ और मोहम्मद उस्मान की मिसाल

विभाजन के दौर की सबसे चर्चित सैन्य कहानियों में सैम मानेकशॉ और ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।

सैम मानेकशॉ ने विभाजन के बाद भारत में सेवा जारी रखी और आगे चलकर भारतीय सेना के पहले फील्ड मार्शल बने।

वहीं ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान ने भारत के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी। 1947-48 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उन्होंने नौशेरा की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और जुलाई 1948 में वीरगति प्राप्त की। उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।

गोरखा सैनिकों का अलग मामला

गोरखा सैनिकों का मामला भी विशेष था। भारत, नेपाल और ब्रिटेन के बीच हुए समझौते के बाद गोरखा रेजिमेंटों का पुनर्गठन किया गया।

भारतीय सेना को छह गोरखा रेजिमेंट मिलीं, जबकि कुछ अन्य गोरखा रेजिमेंट ब्रिटिश सेना का हिस्सा बनीं। इस प्रकार गोरखा सैनिकों की पुरानी सैन्य परंपरा विभाजन के बाद भी अलग-अलग सेनाओं में जारी रही।

हथियार और सैन्य सामान भी बांटा गया

बंटवारा केवल सैनिकों तक सीमित नहीं था। हथियार, वाहन, तोपें, सैन्य उपकरण, गोला-बारूद, वर्दियां, जूते, चिकित्सा सामग्री और दूसरे सैन्य सामान का भी हिसाब लगाया गया।

पाकिस्तान को मिलने वाले कई सैन्य संसाधनों को रेल और अन्य माध्यमों से नए देश तक पहुंचाया जाना था। लेकिन विभाजन के दौरान पंजाब और दूसरे इलाकों में भड़की हिंसा ने इस प्रक्रिया को बेहद मुश्किल बना दिया।

नौसेना और वायुसेना का पुनर्गठन

थल सेना के साथ-साथ Royal Indian Navy और Royal Indian Air Force का भी विभाजन किया गया।

नौसेना के जहाजों, प्रतिष्ठानों और अन्य संसाधनों का पुनर्वितरण हुआ। पाकिस्तान को कराची स्थित महत्वपूर्ण नौसैनिक आधार मिला, जबकि भारत के पास अधिकांश बड़े नौसैनिक प्रतिष्ठान और जहाजों का बड़ा हिस्सा रहा।

इसी तरह वायुसेना के विमानों, स्क्वाड्रनों, तकनीकी कर्मचारियों और अन्य संसाधनों का भी पुनर्गठन किया गया।

कुर्सियों से लेकर किताबों तक हुआ बंटवारा

विभाजन की प्रक्रिया की जटिलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सैन्य कार्यालयों और प्रतिष्ठानों की अनेक छोटी-बड़ी वस्तुओं तक का हिसाब रखा गया।

मेस का सामान, फर्नीचर, टाइपराइटर, बैंड के उपकरण, लाइब्रेरी की सामग्री और अन्य संपत्तियों को भी दोनों देशों के बीच बांटना पड़ा।

कई वस्तुओं का बंटवारा इतना जटिल था कि छोटी-छोटी चीजों तक की सूची तैयार करनी पड़ी।

इतिहास का सबसे कठिन सैन्य पुनर्गठन

1947 का सैन्य विभाजन केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं था। इसके पीछे उन हजारों सैनिकों की व्यक्तिगत कहानियां थीं, जिनके दोस्त, साथी और कभी-कभी परिवार भी विभाजन के कारण अलग हो गए।

आज जब हम स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं, तो हमें उस दौर की उपलब्धियों के साथ-साथ उस पीड़ा को भी याद करना चाहिए, जिसे लोगों और सैनिकों ने झेला था।

1947 में केवल एक सीमा नहीं खींची गई थी—एक साझा सैन्य विरासत भी दो अलग-अलग रास्तों पर चली गई।

🇮🇳 जय हिंद!
🇮🇳 वंदे मातरम्!



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SIP कैसे शुरू करें? Step-by-Step गाइड | म्यूचुअल फंड में आसान निवेश

8/16/2026 07:36:00 pm


 **SIP कैसे शुरू करें? पूरी गाइड (Step-by-Step)**


### SIP क्या है?


SIP यानी **Systematic Investment Plan** म्यूचुअल फंड में नियमित रूप से छोटी-छोटी रकम निवेश करने का तरीका है। आप हर महीने एक तय रकम (जैसे ₹500, ₹1000 या ₹5000) अपने चुने हुए म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं। यह बाजार के उतार-चढ़ाव का फायदा उठाकर औसत लागत को कम करता है और लंबे समय में अच्छा रिटर्न दे सकता है।


### SIP शुरू करने के फायदे


- छोटी रकम से शुरुआत संभव

- रुपी कॉस्ट एवरेजिंग का लाभ

- अनुशासन आता है

- कंपाउंडिंग का पूरा फायदा

- कभी भी शुरू और बंद कर सकते हैं

- टैक्स बेनिफिट (ELSS फंड में)


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### SIP कैसे शुरू करें? (Step-by-Step)


**स्टेप 1: अपना लक्ष्य तय करें**  

रिटायरमेंट, बच्चे की शिक्षा, घर खरीदना या सिर्फ वेल्थ क्रिएशन — लक्ष्य साफ रखें। लक्ष्य के हिसाब से समय और जोखिम तय होगा।


**स्टेप 2: KYC पूरा करें**  

SIP शुरू करने के लिए KYC जरूरी है।  

- आधार + पैन कार्ड से ऑनलाइन KYC हो जाता है  

- ज्यादातर ऐप्स और वेबसाइट्स पर 5-10 मिनट में पूरा हो जाता है


**स्टेप 3: सही म्यूचुअल फंड चुनें**  

- **शुरुआती निवेशक** के लिए: लार्ज कैप या इंडेक्स फंड (Nifty 50, Sensex)  

- **मध्यम जोखिम**: फ्लेक्सी कैप या हाइब्रिड फंड  

- **हाई रिटर्न चाहने वाले**: मिड कैप / स्मॉल कैप (लंबे समय के लिए)  

- **टैक्स सेविंग**: ELSS फंड (3 साल लॉक-इन)


**स्टेप 4: प्लेटफॉर्म चुनें**  

आप ये तरीके अपना सकते हैं:

- म्यूचुअल फंड कंपनी की वेबसाइट/ऐप (Direct Plan)

- Groww, Zerodha Coin, Paytm Money, ET Money, Kuvera

- बैंक के जरिए (HDFC, SBI, ICICI आदि)


**नोट:** Direct Plan में कमीशन नहीं कटता, इसलिए रिटर्न थोड़ा बेहतर मिलता है।


**स्टेप 5: SIP रजिस्टर करें**  

1. अकाउंट बनाएं / लॉगिन करें  

2. फंड सर्च करें  

3. “Start SIP” पर क्लिक करें  

4. राशि डालें (न्यूनतम ज्यादातर ₹100 या ₹500)  

5. तारीख चुनें (1, 5, 10, 15 आदि)  

6. बैंक अकाउंट लिंक करें और ऑटो-डेबिट (e-Mandate) सेट करें  

7. OTP से कन्फर्म करें


**स्टेप 6: नियमित निगरानी करें**  

हर 6-12 महीने में पोर्टफोलियो चेक करें। जरूरत पड़ने पर फंड बदल सकते हैं (Switch) या राशि बढ़ा सकते हैं (Step-up SIP)।


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### SIP शुरू करते समय ध्यान रखने वाली बातें


- कम से कम **5-7 साल** का नजरिया रखें  

- बाजार गिरने पर घबराकर SIP बंद न करें  

- Step-up SIP का इस्तेमाल करें (साल में 10% बढ़ाएं)  

- एक ही फंड में सारा पैसा न लगाएं, 2-3 अच्छे फंड में बांटें  

- इमरजेंसी फंड अलग से बनाकर रखें


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### आम गलतियां जो बचनी चाहिए


- सिर्फ पिछले रिटर्न देखकर फंड चुनना  

- बहुत ज्यादा फंड में SIP शुरू करना  

- बाजार गिरते ही SIP रोक देना  

- बिना लक्ष्य के निवेश करना


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**निष्कर्ष:**  

SIP शुरू करना आज के समय में सबसे आसान और स्मार्ट तरीकों में से एक है। छोटी शुरुआत कीजिए, नियमित रहिए और लंबे समय तक निवेश करते रहिए। समय के साथ कंपाउंडिंग आपका पैसा कई गुना बढ़ा सकती है।

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Personal Finance Guide 2026: बजट, बचत, निवेश और बीमा की पूरी जानकारी

8/16/2026 07:31:00 pm


### वित्त क्या है और क्यों जरूरी है?


वित्त (Finance) वह विज्ञान और कला है जो पैसे के प्रबंधन, निवेश, बचत, खर्च और जोखिम से संबंधित है। चाहे आप व्यक्तिगत जीवन की बात करें या बिजनेस की, सही वित्तीय ज्ञान के बिना अच्छी कमाई भी बेकार हो सकती है।


आज के समय में महंगाई बढ़ रही है, नौकरियां अस्थिर हो रही हैं और रिटायरमेंट की जिम्मेदारी खुद पर है। इसलिए हर व्यक्ति को बुनियादी वित्तीय ज्ञान होना चाहिए।


### व्यक्तिगत वित्त के 5 मुख्य स्तंभ


1. **कमाई (Income)**  

   सैलरी, बिजनेस, फ्रीलांसिंग या साइड हसल से आने वाला पैसा। जितना संभव हो, आय के स्रोत बढ़ाएं।


2. **बजटिंग (Budgeting)**  

   50-30-20 नियम अपनाएं:  

   - 50% जरूरतें (किराया, खाना, बिल)  

   - 30% चाहतें (मनोरंजन, शॉपिंग)  

   - 20% बचत और निवेश


3. **बचत (Saving)**  

   आपातकालीन फंड बनाएं (कम से कम 6 महीने के खर्च के बराबर)।  

   हाई-इंटरेस्ट सेविंग अकाउंट या लिक्विड फंड में पार्किंग करें।


4. **निवेश (Investment)**  

   सिर्फ बचत करने से पैसा नहीं बढ़ता। महंगाई को हराने के लिए निवेश जरूरी है।  

   विकल्प:  

   - म्यूचुअल फंड (SIP के जरिए)  

   - शेयर बाजार (लंबे समय के लिए)  

   - PPF, NPS, EPF  

   - सोना (SGB या डिजिटल गोल्ड)  

   - रियल एस्टेट (जरूरत और क्षमता के अनुसार)


5. **बीमा और सुरक्षा (Insurance & Protection)**  

   टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस अनिवार्य हैं। बिना इनके एक बड़ी बीमारी या दुर्घटना पूरे परिवार को आर्थिक रूप से तोड़ सकती है।


### आम गलतियां जो ज्यादातर लोग करते हैं


- केवल बचत करना और निवेश न करना  

- कर्ज (खासकर क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन) को हल्के में लेना  

- बिना रिसर्च के शेयर या क्रिप्टो में पैसा लगाना  

- रिटायरमेंट प्लानिंग को बहुत देर से शुरू करना  

- इमरजेंसी फंड न रखना


### सफलता का फॉर्मूला


**कमाओ → बचाओ → निवेश करो → सुरक्षित रखो → दोहराओ**


जितनी जल्दी आप शुरू करेंगे, चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest) का फायदा उतना ज्यादा मिलेगा। 25 साल की उम्र में शुरू करने वाला व्यक्ति 35 साल की उम्र में शुरू करने वाले से कई गुना आगे निकल जाता है।


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Kiratpur-Manali Four Lane: 50 करोड़ से सुधरेगी हणोगी टनल

8/16/2026 06:59:00 pm




 



मंडी: कीरतपुर-मनाली फोरलेन परियोजना के तहत हणोगी के पास क्षतिग्रस्त हुई नवनिर्मित टनल की मरम्मत का काम शुरू हो गया है। इस महत्वपूर्ण मरम्मत कार्य पर करीब 50 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और इसे सितंबर 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

हणोगी के पास पहाड़ी दरकने के कारण टनल के करीब 24 मीटर लंबे हिस्से को भारी नुकसान पहुंचा था। इसके चलते दयोड़ से हणोगी तक तैयार की गई चार टनलों का निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद उनमें यातायात शुरू नहीं किया जा सका है।

NHAI ने सौंपा मरम्मत का जिम्मा

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने क्षतिग्रस्त टनल की मरम्मत का जिम्मा गावर कंस्ट्रक्शन लिमिटेड को सौंपा है। कंपनी द्वारा टनल निर्माण के विशेषज्ञ भारत कंस्ट्रक्शन कंपनी के माध्यम से मरम्मत कार्य करवाया जा रहा है।

काम शुरू करने से पहले क्षतिग्रस्त हिस्से की स्थिति और सुरक्षा का आकलन करने के लिए कई सर्वे किए गए। आवश्यक तकनीकी जांच और सर्वे पूरा होने के बाद अब मौके पर मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है।

अगस्त अंत तक अंदरूनी काम पूरा करने का लक्ष्य

मरम्मत कार्य को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। योजना के अनुसार अगस्त के अंत तक टनल के अंदरूनी हिस्से का काम पूरा करने का लक्ष्य है, जबकि सितंबर के अंत तक बाहरी कार्य भी पूरा करने की तैयारी है।

मरम्मत पूरी होने के बाद दयोड़ से हणोगी तक बनी टनलों को यातायात के लिए खोलने की दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

चार टनलों में यातायात शुरू होने की उम्मीद

दयोड़ से हणोगी तक फोरलेन परियोजना के तहत चार टनलों का निर्माण पूरा हो चुका है। हालांकि हणोगी टनल के क्षतिग्रस्त हिस्से के कारण इनका इस्तेमाल यातायात के लिए नहीं किया जा सका है।

एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर वरुण चारी के अनुसार, दयोड़ से हणोगी तक टनलों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और अब मुख्य रूप से क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत का काम बाकी है। मरम्मत पूरी होने के बाद सुरक्षा और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर टनलों में यातायात शुरू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत

कीरतपुर-मनाली फोरलेन हिमाचल प्रदेश के प्रमुख सड़क संपर्क मार्गों में से एक है। हणोगी क्षेत्र में टनलों के यातायात के लिए खुलने से मंडी-मनाली मार्ग पर यात्रा को अधिक सुगम बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से पर्यटन सीजन के दौरान इस मार्ग पर यातायात का दबाव कम करने में टनलों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

फिलहाल सभी की नजरें मरम्मत कार्य की प्रगति पर हैं। यदि निर्धारित समयसीमा के अनुसार काम पूरा होता है, तो सितंबर के अंत तक हणोगी टनल को यातायात के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।



दत्तनगर मिल्क प्लांट के पास 7 ग्राम चिट्टा बरामद, चार गिरफ्तार

8/16/2026 06:46:00 pm





 रामपुर बुशहर: नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत रामपुर थाना पुलिस ने दत्तनगर मिल्क प्लांट के पास एक संदिग्ध वाहन की तलाशी लेकर 7 ग्राम हेरोइन (चिट्टा) बरामद किया है। पुलिस ने मामले में वाहन सवार चार लोगों को गिरफ्तार किया है। बरामद नशीले पदार्थ के साथ वाहन को भी पुलिस ने कब्जे में ले लिया है।

पुलिस के अनुसार टीम दत्तनगर मिल्क प्लांट के पास वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान एक संदिग्ध वाहन को रोककर उसकी तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान पुलिस को वाहन के फुट मैट के नीचे छिपाकर रखा गया नशीला पदार्थ मिला। जांच के बाद इसकी मात्रा 7 ग्राम पाई गई।

चार आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने इस मामले में अक्षय (30), पवन (32) और बिपुल शर्मा (32), सभी निवासी रामपुर, जिला शिमला, तथा सुनील ठाकुर (40), निवासी जोगिंद्रनगर, जिला मंडी को गिरफ्तार किया है।

पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने उस वाहन को भी जब्त कर लिया है, जिसमें नशीला पदार्थ बरामद हुआ था।

पुलिस जांच जारी

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद चिट्टा आरोपियों के पास कहां से आया था और इसे कहां ले जाया जा रहा था। इसके अलावा मामले में आरोपियों की भूमिका और आपस में उनके संपर्कों की भी जांच की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच तथ्यों के आधार पर की जा रही है।

नोट: आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज होना आरोप सिद्ध होने के समान नहीं है। अंतिम दोषसिद्धि न्यायालय के निर्णय पर निर्भर करेगी।



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